हो बो जा .... जी हां..
यदि आप मुझ जैसे हिंदी पट्टी क्षेत्र से आते हैं तो आपके लिए 'हो बो जा' कुछ अजीब हो सकता है। मेरे लिए भी था जब मैंने पहली बार यह तीन शब्द सुने थे....
हो बो जा मतलब - अब निकल...
इसका मतलब होता है अब निकल... आसामी शब्द है... मैनें भी पहले नहीं सुना था...
पहली बार मैंने यह 8 सितंबर को सुना था....
राजीव चौक से द्वारका मोड़ की मैट्रो में चढ़ गया था उसके साथ....
पर आप यकिन मानिए जिस ब्लू लाइन मैट्रो पर सबसे ज्यादा लोग ट्रेवल करते हैं उस लाइन पर मुझे भीड़ का अंदाजा भी न हुआ था। मंडे था... शाम के सात बज गए थे.... लेट भी हो गई वह... शायद मेरी वजह से... या फिर शायद अपनी वजह से... खैर, वह लेट हो गई थी... मंडे इवनिंग का पीक ऑर्स जब मैट्रो में सबसे ज्यादा भीड़ होती है... हम मंडी हाउस से चढ़े... (पता नहीं कब उतरेंगे) घंड़ी के हिसाब से 40 से ज्यादा मिनट नहीं लगते मंडी हाउस से जनकपुरी पहुंचने में.... पर पता नहीं क्यों उस दिन मालूम ही नहीं चला कि 40 मिनट कैसे बीत गए...
इसी मैट्रो में पहली बार सुना था 'हो बो जा'
बिहार की बीज को खाद आसाम में मिली थी पर वह पेड़ बनने दिल्ली आ गया था... या फिर किस्मत ले आई थी... पता नहीं मुझे....
उसी ने बताया था होबोजा का मतलब.... अब चल निकल...
फिर कुछ और भी बोला था उसने... क्या बोला था याद नहीं आ रहा... पर बोलो था... ऐसा ही कुछ था....
बस दो मिनट देना आभी आता हूं... कल वहट्सएप पर भी शायद उसने लिखकर भेजा था.... अभी चेक करता हूं...
'बेसी कोबो नालागे' हां... कहा था न मैंने की उसने वहट्एप पर लिखा कर भेजा था मुझे... यही लिखा था..
Besi kobo nalage..
jyda mat bolo
उसके मैसेज में यही लिखा था...तो मैंने मान लिया...
चलिए बस आज के लिए इतना ही... शायद 40 से ज्यादा घंटे हो गए इन आखों को बंद हुए... अब आराम चाहिए... माफी भी... कि पहले दिन ही ऐसे जाना पड़ रहा है। लेकिन कोशिश रहेगी की कुछ न कुछ जरूर आप तक पहुंचाता रहूं....अभी के लिए हो बो जा!!
यदि आप मुझ जैसे हिंदी पट्टी क्षेत्र से आते हैं तो आपके लिए 'हो बो जा' कुछ अजीब हो सकता है। मेरे लिए भी था जब मैंने पहली बार यह तीन शब्द सुने थे....
हो बो जा मतलब - अब निकल...
इसका मतलब होता है अब निकल... आसामी शब्द है... मैनें भी पहले नहीं सुना था...
पहली बार मैंने यह 8 सितंबर को सुना था....
राजीव चौक से द्वारका मोड़ की मैट्रो में चढ़ गया था उसके साथ....
पर आप यकिन मानिए जिस ब्लू लाइन मैट्रो पर सबसे ज्यादा लोग ट्रेवल करते हैं उस लाइन पर मुझे भीड़ का अंदाजा भी न हुआ था। मंडे था... शाम के सात बज गए थे.... लेट भी हो गई वह... शायद मेरी वजह से... या फिर शायद अपनी वजह से... खैर, वह लेट हो गई थी... मंडे इवनिंग का पीक ऑर्स जब मैट्रो में सबसे ज्यादा भीड़ होती है... हम मंडी हाउस से चढ़े... (पता नहीं कब उतरेंगे) घंड़ी के हिसाब से 40 से ज्यादा मिनट नहीं लगते मंडी हाउस से जनकपुरी पहुंचने में.... पर पता नहीं क्यों उस दिन मालूम ही नहीं चला कि 40 मिनट कैसे बीत गए...
इसी मैट्रो में पहली बार सुना था 'हो बो जा'
बिहार की बीज को खाद आसाम में मिली थी पर वह पेड़ बनने दिल्ली आ गया था... या फिर किस्मत ले आई थी... पता नहीं मुझे....
उसी ने बताया था होबोजा का मतलब.... अब चल निकल...
फिर कुछ और भी बोला था उसने... क्या बोला था याद नहीं आ रहा... पर बोलो था... ऐसा ही कुछ था....
बस दो मिनट देना आभी आता हूं... कल वहट्सएप पर भी शायद उसने लिखकर भेजा था.... अभी चेक करता हूं...
'बेसी कोबो नालागे' हां... कहा था न मैंने की उसने वहट्एप पर लिखा कर भेजा था मुझे... यही लिखा था..
Besi kobo nalage..
jyda mat bolo
उसके मैसेज में यही लिखा था...तो मैंने मान लिया...
चलिए बस आज के लिए इतना ही... शायद 40 से ज्यादा घंटे हो गए इन आखों को बंद हुए... अब आराम चाहिए... माफी भी... कि पहले दिन ही ऐसे जाना पड़ रहा है। लेकिन कोशिश रहेगी की कुछ न कुछ जरूर आप तक पहुंचाता रहूं....अभी के लिए हो बो जा!!
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